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‘यमराज का बुलावा’

‘यमराज का बुलावा’

धर्म के देवता व काल के स्वामी यमराज अपनी न्याय गद्दी पर आसीन थे। और चित्रगुप्त के साथ आत्माओं के पाप – पुण्य का लेखा जोखा देख रहे थे। ये वो भारतीय आत्माएं थी जिनमें असमंजस था। कि उन्हें स्वर्ग भेजा जाये या नर्क में। अतः इन्हें पेंडिंग रखा गया था। यमराज जी व चित्रगुप्त ने इनके लिए अलग से समय निकाला।


चित्रगुप्त जी – प्रभु यह राजू छिलके की आत्मा है। राजू छिलका ने काफी लड़कियों को छेड़ा है। किन्तु कहीं लड़कियों की क्लास में पढ़ते समय मदद भी की थी। प्रभु आप ही बताएं छिलके को स्वर्ग में फेंके या नर्क में।

यमराज जी – मामला वाकई काफी गंभीर है चित्रगुप्त। मि. राजू छिलका बताओ तुम्हारी क्या इच्छा है। स्वर्ग जाओगे या नर्क। (यमराज जी ने राजू छिलके से पुछा)

राजू छिलका – प्रभु कहीं भी भेज दो – बस जहां भी भेजो वहां आइटम अच्छे हो।

चित्रगुप्त – आइटम बोले तो छिलके, महाराज यमराज समझे नहीं।

राजू छिलका – कहने का मतलब सुन्दर कन्यायें जहाँ हो प्रभु। आये दिन आइटम डांस देखने को मिले। अपने लिए तो वह जगह स्वर्ग से भी बढ़कर है।

चित्रगुप्त – घोर पापी प्रभु ! घोर पापी। यह पक्का नरक में जाने योग्य है।


यमराज जी – धीरज धरो चित्रगुप्त। राजू छिलका के बारे में पहले पूर्ण सुनिश्चित तो कर लें। केवल राजू की मनचली भावना के आधार पर न्याय नहीं दे सकते। तो छिलका सर्वप्रथम तो तुम यह बताओ – तुम मरे कैसे ?

राजू छिलका – यमराज जी ! हुआ यूँ के मैं केला खाते हुए एक लड़की का पीछा कर रहा था। मैं जैसे ही केला खाकर छिलका फेंका। तो पीछे से हॉर्न की आवाज आयी। मुड़के देखा तो ट्रक।

यमराज जी – और ट्रक ने तुझे छिलका बना दिया। मतलब ट्रक ने तुझे पीछे से मारा।

चित्रगुप्त – क्यों रे छिलके तेरे शहर में ट्रक सामने से नहीं आते। ज्यादातर ये ट्रक टक्कर पीछे से क्यों मारते हैं। साला मरने और मारने का मजा ही खराब कर देतें हैं।

राजू छिलका – नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ। ट्रक ने ना तो आगे से मारा ना पीछे से। दरअसल ट्रक मारता उससे पहले ही मैं केले के छिलके पर फिसल गया। और ट्रक ऊपर से निकल गया।

हा ……. हा ….. हा ….. हा ……… सभी जोर से हँसते हैं।

तो फिर मरा कैसे।

राजू छिलका – ये तो आप ही बताओ। कि आप ने बिना मरे उठाया कैसे ? कैसा यमराज का बुलावा है ? क्या ये पाप नहीं है ?

यमराज जी – साइड में खड़ा कर दे इसको। अभी इसके बारे में बाद में विचार करेंगे।

चित्रगुप्त – प्रभु अब जो ये दूसरी आत्मा है। वह एक लड़की की है इसका नाम लाली रुपाली है। पेशे से यह एक टीचर थी। इसने बच्चो का बहुत मार मार के लाल किया। लेकिन साथ ही इसने अनेक नस्ल के बहुत सारे कुत्त्ते भी पाल रखे थे। जिनको इसने बहुत प्यार से लाल किया। यह लाली के पाप पुण्य का लाल लाल इतना हो गया प्रभु कि कुछ समझ नहीं आ रहा।


यमराज जी – अरे पाप पुण्य छोड़ो चित्रगुप्त ? इसका मेकअप देखो। कितना डरावनी है लाली रुपाली ? शक्ल से ही नरक में जाने लायक है। स्वर्ग में भेजकर दाग थोड़े ही लगाना है।


रुपाली – नहीं प्रभु फिर कभी मेकअप नहीं करुँगी। प्लीज स्वर्ग भेज दो। चेहरे पर काले दाग देखकर ही तो मुझे हार्ट अटैक आया था। लिपस्टिक, पावडर, क्रीम का आज से उपवास शुरू प्रभु। प्लीज स्वर्ग में ही जाने दो।

चित्रगुप्त – नहीं प्रभु ! ऐसी स्त्री के लिए स्वर्ग में तो कोई जगह हो ही नहीं सकती। मेकअप करके ना जाने कितनों का हार्ट अटैक दिया होगा। यह शुद्ध पापिन हैं।


यमराज – वैसे एक बात कहूँ चित्रगुप्त ! यह स्वर्ग और नरक दोनों के लिए नहीं हैं। ऐसी लड़कियों के लिए धरती ही उपयुक्त है। क्यों कि हो ना हो लोगों की जान लेने में हमारी एक प्रकार से सहायक है। ( रुपाली को देखकर ) रुपाली तो फिलहाल तुम साइड में खड़ी हो जाओ।


रुपाली – प्रभु क्यों वेट करवा रहे हो। धरती पर वापिस भेजना हो तो भेज दो ना। मेरा बॉयफ्रेंड मेरा वेट कर रहा होगा। वैसे भी आपके दूत बॉडी सहित ले आये। हार्ट अटैक आया था। मरी नहीं थी।


चित्रगुप्त – हाँ तो कौनसा बॉयफ्रेंड के बिना मर ही जायेगी। वैसे भी तेरा दसवां बॉयफ्रेंड था। ग्यारवां फिर बना लेना। फिलहाल साइड में खड़ी हो जाओ नादान लड़की।


यमराज – अगला कौन है चित्रगुप्त ?

चित्रगुप्त जी – प्रभु अब जो दुविधा वाली आत्मा है। वह है पप्पू रेज़र की। पप्पू रेजर बाल काटने का काम करता है। इसने कहीं लोग के सर का बोझ कम किया है। पर ये अपनी पत्नी के लिए ही बोझ है। पत्नी को प्यार नहीं करता है। परायी स्त्री पर नजर रखता है।यमराज – वाकई काफी गलत बात है। जब इसके पास नजर रखने के लिए खुद की स्त्री है। फिर परायी स्त्री पर नजर रखना कितना मूर्खता भरा है। इस गन्दी आदत की वजह से तो रेजर दाढ़ी बनाते वक्त किसी की गर्दन भी काट सकता है। वैसे एक बात बता तुम मरे कैसे पप्पू रेजर। (पप्पू रेजर से पूछा )


पप्पू रेज़र – प्रभु वहां एक लड़की थी।


चित्रगुप्त – घोर पापी प्रभु ! घोर पापी ! फिर लड़की। मरते वक्त भी परायी स्त्री पर नजर।


पप्पू रेज़र – सुन तो लो प्रभु।


यमराज जी – हाँ बोलो रेजर।


पप्पू रेज़र – एक लड़की थी प्रभु। एक लड़की …. एक लड़की ….. एक लड़की


यमराज जी – अरे आगे बोलो। मैं उस लड़की का बाप नहीं हूँ। लड़की थी। …….. लड़की थी।


पप्पू रेज़र – हाँ प्रभु वहां लड़की नहीं। लड़की का बाप ही था। बस पिताजी को देखा और अब आपको देख रहा हूँ।


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